पिथौरागढ़-ॐ पर्वत में जिस तरह से प्राकृतिक रूप से ””””ॐ”””” शब्द का आकार बना है उसी तरह शिव के प्राचीन निवास स्थल आदि कैलाश में त्रिशूल है। अधिक बर्फबारी होने के बाद प्राकृतिक रूप से बना यह त्रिशूल और अधिक स्पष्ट नजर आता है। नीचे की ओर झुके इस त्रिशूल को देखकर ऐसा लगता है जैसे भगवान शिव स्वयं इसे हाथों में पकड़े विराजमान हों।लगभग 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित ज्योलिंगकांग में आदि कैलाश पर्वत और पार्वती सरोवर के दर्शनों के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्यास घाटी जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान लोगों ने ज्योलिंगकांग बेस कैंप में पार्वती सरोवर को जाने वाले मार्ग में स्थापित किए गए 28 फुट ऊंचे त्रिशूल को तस्वीरों में बहुत देखा, लेकिन कम ही लोगों को पता है कि आदि कैलाश पर्वत पर भी एक त्रिशूल की प्राकृतिक आकृति भी है। आदि कैलाश पर्वत पर बना यह त्रिशूल नीचे की ओर बना हुआ है। इसका दाहिना हिस्सा आगे की ओर खंडित है लेकिन बर्फबारी के बाद यह हिस्सा भी भर जाता है। गौरी कुंड के ऊपर स्थित इस त्रिशूल पर नजर पड़ते ही ऐसा लगता है जैसे भगवान शिव अपने प्राचीन निवास स्थल आदि कैलाश पर्वत पर त्रिशूल रखकर स्वयं विराजमान हों।







