130 साल पुरानी परंपरा को संजो रहे स्थानीय कलाकार, राम जन्म से ताड़का वध तक की लीलाओं ने बांधा समां
सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पहली दिन की लीला कमलेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होती है, व सभी अन्य दिनों की लीला रामलीला मैदान में होती है।
श्रीनगर गढ़वाल । बारिश की बूंदें भी रामभक्तों की आस्था को डिगा नहीं सकीं। श्रीनगर गढ़वाल के कमलेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में रविवार को श्री आदर्श रामलीला समिति की रामलीला के 127वें मंचन का भव्य शुभारंभ हुआ। खराब मौसम के बावजूद रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे और पंडाल खचाखच भरा रहा। भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर ताड़का वध तक के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। स्थानीय कलाकारों के अभिनय और भक्ति गीतों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।
करीब 130 वर्ष पुरानी रामलीला परंपरा के तहत आयोजित पहले दिन की लीला का शुभारंभ कमलेश्वर मंदिर के श्रीनगर की महापौर आरती भंडारी और महंत आशुतोष पुरी ने किया।

शिव-पार्वती संवाद से राम जन्म तक की लीला ने मोहा मन : रामलीला के पहले दिन कैलाश लीला, राम जन्म, ताड़का वध, मारीच तारण और सुबाहु वध के प्रसंगों का मंचन किया गया। शुरुआत माता पार्वती के भगवान शिव से श्रीराम कथा सुनाने के आग्रह और शिवजी द्वारा रामकथा का वर्णन करने के दृश्य से हुई। इसके बाद रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की तपस्या तथा ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने की लीला प्रस्तुत की गई।
रावण द्वारा कैलाश पर्वत उठाने के प्रयास और भगवान शिव द्वारा उसे दंडित किए जाने के दृश्य ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इसके बाद राजा दशरथ की व्यथा और भगवान श्रीराम के जन्म के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन हुआ। कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। ताड़का वध के साथ पहले दिन की लीला का समापन।
स्थानीय कलाकार निभा रहे हैं प्रमुख भूमिकाएं : रामलीला में भगवान शिव की भूमिका हरीश पुरी, माता पार्वती की आरुषि डोभाल, रावण की विजय मोहन उनियाल, श्रीराम की अभिषेक रावत और लक्ष्मण की पवन जोशी निभा रहे हैं। गुरु विश्वामित्र की भूमिका अनमोल काला, नारद की राघव जोशी, मारीच की आकाश, ताड़का एवं कुंभकर्ण की मनीष बडोनी और सुबाहु की अंकित रावत निभा रहे हैं।
वहीं दशरथ की भूमिका मुकेश सेमवाल, विभीषण की सुधीर डंगवाल, भरत की कन्हैया, शत्रुघ्न की अंश बडोनी, श्रृंगी ऋषि की सागर अग्रवाल, कौशल्या की गीता नेगी, सुमित्रा की जयंती और कैकेयी की भूमिका शशि निभा रही हैं।
संगीत निर्देशन वीरेंद्र रतूड़ी कर रहे हैं। तबले पर राजमोहन कंडवाल, कीबोर्ड पर जगमोहन कंडवाल और प्रकाश पोखरियाल, ढोलक पर शिवलाल तथा ऑक्टापैड पर संजय पांडे संगत दे रहे हैं। प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था हरीश मिश्रा और देशराज, मंच व्यवस्था प्रमोद कुमार तथा मेकअप की जिम्मेदारी इनकुश मेहता संभाल रहे हैं।
समिति के अध्यक्ष देवेंद्र मणि मिश्रा, संरक्षक बुद्धिबल्लभ उनियाल एवं दिनेश असवाल, उपाध्यक्ष विजय रावल एवं आशीष उनियाल, सचिव हिमांशु अग्रवाल और कोषाध्यक्ष संजय जैन सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। समिति ने नगरवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर रामलीला का आनंद लें और इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।






