ब्यूरो-जोशीमठ में सबसे अधिक भू-धंसाव दिसंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच हुआ। जोशीमठ में भूधंसाव के कारणों और अब वहां के हालात को लेकर विज्ञानियों से कराए गए अध्ययन में नई-नई जानकारियां सामने आई हैं। नौ संस्थाओं के विज्ञानियों की रिपोर्ट को राज्य सरकार ने हाल ही में सार्वजनिक किया है। भूकंप की दृष्टि से देखें तो यह पूरा क्षेत्र अति संवेदनशील श्रेणी में है। लिहाजा, राज्य सरकार भी इसे गंभीरता से ले रही है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान से कराया गया अध्ययन भी इस चिंता को जाहिर करता है। संस्थान के विज्ञानियों ने भूकंप की छोटी से छोटी हलचल को रिकॉर्ड करने के लिए क्षेत्र में 11 सिस्मिक स्टेशन स्थापित किए हैं। जो ब्रॉडबैंड आधारित है और वाडिया संस्थान में स्थापित कंट्रोल रूम को रियल टाइम जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।
11 सिस्मिक स्टेशन हुए स्थापित
इस बात की जानकारी हाल में सार्वजनिक की गई, वाडिया संस्थान की अध्ययन रिपोर्ट में साझा की गई है। वाडिया की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, 11 सिस्मोलॉजिकल स्टेशन का जो नेटवर्क तैयार किया गया है, वह एक मैग्नीट्यूड तक के सूक्ष्म भूकंप तक को रिकॉर्ड करने में सक्षम है।
भूकंप से कांपी थी जोशीमठ की धरती
अध्ययन रिपोर्ट में संस्थान के विज्ञानियों ने 13 जनवरी से 12 अप्रैल के बीच आए भूकंपों को रिकॉर्ड किया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में जोशीमठ के 50 किलोमीटर के दायरे में 1.5 मैग्नीट्यूड के 16 बार भूकंप रिकॉर्ड किए गए। इसे विज्ञानियों ने इस भूकंपीय जोन के लिहाज से सामान्य माना है। वर्ष 1999 के चमोली भूकंप का केंद्र जोशीमठ के दक्षिण में रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 1999 में चमोली जिले में जो 6.6 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था, उसका केंद्र जोशीमठ के दक्षिण में था।
मंडरा रहा है भूकंप का डर
बीते 50 साल में भी जो भूकंप इस बेल्ट में रिकॉर्ड किए गए हैं, वह सभी चमोली के भूकंप के केंद्र के आसपास ही आए हैं। इससे यह पता चलता है कि इस पूरे क्षेत्र में भूकंप की सूक्ष्म घटनाएं निरंतर हो रही हैं। यह स्थिति भूगर्भ में निरंतर तनाव की ओर भी इशारे करती है। 10 किलोमीटर की कम गहराई में आ रहे भूकंप वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के विज्ञानियों के अनुसार, हाल में जो भी सूक्ष्म भूकंप रिकॉर्ड किए गए हैं, वह भूगर्भ में महज 10 किलोमीटर की गहराई में आए हैं।
सबसे उच्च क्षमता का भूकंप 100 किलोमीटर दूर आया
रिपोर्ट के मुताबिक सिस्मोग्राफ ने अध्ययन अवधि में सबसे बड़ा भूकंप 24 जनवरी 2023 को 5.4 मैग्नीट्यूट का रिकॉर्ड किया। हालांकि, इसका केंद्र जोशीमठ से 100 किलोमीटर नेपाल के पश्चिमी भाग में पाया गया। सिस्मोग्राफ निरंतर रिकार्ड कर रहा शोर भूगर्भीय हलचल से उत्पन्न ध्वनि को भी सिस्मोग्राफ निरंतर रिकॉर्ड कर रहे हैं। विज्ञानियों के मुताबिक जोशीमठ क्षेत्र में सिस्मोग्राफ निरंतर ध्वनि महसूस कर रहे हैं। रात के मुकाबले यह ध्वनि दिन के समय अधिक सुनाई दे रही है। सिस्मिक स्टेशन पैन्का, औली रोड, मारवाड़ी, भौना, हेलंग, मेराग, थंग, रविग्राम, अपर बाजार, तपोवन, गुरुगंगा में स्थापित किए गए हैं।
दो महीने में छह सेमी से एक मीटर तक धंसा जोशीमठ
वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जियोफिजिकल इंस्टीट्यूट, हैदराबाद के अध्ययन में एक किमी लंबाई की लाइन में सेटेलाइट से लिए चित्रों में जोशीमठ के 6 सेमी से एक मीटर तक धंसने के आंकड़े दर्ज किए गए। हालांकि एक मीटर तक भू-धंसाव एक सीमित क्षेत्र में था। इसके साथ ही जमीन के भीतर 10 मीटर तक बड़े बोल्डरों का पता चला। एनजीआरआई की जोशीमठ में भू-वैज्ञानिक और भू-तकनीकी के आधार पर प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां की चट्टानें और उसमें मौजूद मिट्टी या दूसरे कण पूरे जोशीमठ में एक समान नहीं हैं, इसकी अधिकतम मोटाई नालों और नालों के आसपास देखी गई है। जमीन में दरारें ज्यादातर मोटे आवरण वाले क्षेत्रों में देखी गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जोशीमठ मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) फॉल्ट-लाइन के ऊपर बसा है। यह लाइन हेलंग में जोशीमठ के दक्षिण के करीब से गुजरती है, जिससे चट्टानें संरचनात्मक रूप से कमजोर और कट जाती हैं। यहां छोटे-छोटे भूकंप दर्ज किए जाने हैं लेकिन भविष्य में बड़े भूकंप की संभावना से इनकार किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जोशीमठ शहर के आसपास का क्षेत्र ओवर बर्डन सामग्री (एक बहुत पुराना भूस्खलन) की मोटी परत से ढका है और यह लंबे समय से धीरे-धीरे धंस रहा है, जिसे औपचारिक रूप से सबसे पहले 1976 में मिश्रा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में प्रस्तुत किया था।
एनजीआरआई ने तीन तरीके से किया अध्ययन
एनजीआरई ने तीन तरीके से सर्वे को अंजाम दिया है। इसमें एक कृत्रिम भूकंप, दूसरा जमीन के भीतर बिजली का करंट पास करके और तीसरा जमीन के भीतर लेजर की किरणें भेजकर। इन तीनों सर्वे के नतीजे के आधार पर इन्होंने अपनी रिपोर्ट बनाई है।
50 सेमी चौड़ी और 35 मीटर गहरी दरारें उभरीं
जोशीमठ के भूगर्भीय सर्वेक्षण में सामने आया कि कठोर चट्टानों के ऊपर 35 मीटर से भी अधिक का मलबा जमा है, जो ग्लेशियर और लैंडस्लाइड से जमा हुआ है। इस मलबे में करीब 15 मीटर की मोटी परत कम कठोरता वाली मृदु मिट्टी से बनी है। दूसरी परत 20 मीटर पर है, जो अधिक कठोर और घनी है। इसके नीचे एक बार फिर से कम कठोरता वाली परत है। जोशीमठ में उत्पन्न दरारें धरातल पर करीब 50 सेंटीमीटर तक चौड़ी हैं। इनकी चौड़ाई अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग है। जबकि गहराई 20 से 35 मीटर से भी अधिक है।







