• About
  • Contact
No Result
View All Result
  • Login
Pahadvasi
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • अपराध
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • यूथ
  • शिक्षा
  • खेल
  • स्वास्थ्य
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • अपराध
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • यूथ
  • शिक्षा
  • खेल
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
Pahad Vasi
No Result
View All Result
Home गढ़वाल

अनाज भंडारण और कला की अनूठी परम्परा है “कुठार”

by पहाड़वासी
July 21, 2023
in गढ़वाल
Reading Time: 1 min read
0
Share on WhatsappShare on FacebookShare on Twitter


टिहरी गढ़वाल(प्रदीप शाह)-जनपद‌ के प्रताप नगर विकास खंड के पट्टी उपली रमोली मध्य मुखमाल गांव में पूर्व सरपंच सत्ते सिंह राणा के घर पर लगभग ढाई सौ वर्ष पुराना यह खूबसूरत कोठार अपनी सान ,पहाड़ी शैली की बनावट के लिए लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है।कुठार यानी वह गोदाम जिसमें अनाज रखा जाता है, अन्न के भंडारण का वह साधन जिसमें धान, गेंहू, कोदू, झंगोरा, चौलाई या दालें सालों तक रखी जा सकती है. कोठार में रखे हुए इन धनधान्य के खराब होने की संभावना न के बराबर होती है. कोठार को पहाड़ी कोल्ड स्टोर के नाम से जाना जाता है, जिसमें धान, गेंहू, कोदू, झंगोरा, चौलाई या दालें सुरक्षित रखी जाती है।
कोठार अथवा कुठार जो कि मुख्यतः देवदार,बांझ, रयाल की लकड़ी के बने होते हैं और ये सिर्फ भंडार ही नहीं हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग भी रहे हैं, इस भंडार में हमारे बुजुर्गों ने कई पीढ़ियों तक अपने अनाजों और जरूरत के सारे साजो-सामान रखे हैं। ये दिखने में जितने आकर्षक होते हैं उतने ही फायदेमंद भी,पहाड़ों में पुराने समय में लोग सिर्फ खेती किसानी को ही बढ़ावा देते थे और उसी खेती किसानी के जरिए उनकी आमदनी भी होती थी। वस्तु विनिमय का जमाना भी था तो लोग बाज़ार और नौकरी को ज्यादा महत्व नहीं देते थे,पहले के समय लोग खेती किसानी से अन्न जैसे धान, गेहूं, मंडवा (कोदा), झंगोरा, कौणी, चिणा, मक्का, जौ या दालें जैसे कि राजमा, उड़द, तोर, रंयास, गहथ, लोबिया, नवरंगी या किसी भी प्रकार की फसलें उगाते थे सबको रखने की एकमात्र जगह थी कुठार, जो कि मुख्य घर से अलग ही होता था।
जो दूर से दिखने में एक अलग मकान जैसा ही होता है बाहर से दिखने पर लगेगा कि छोटा-सा है पर इसके अंदर जाकर ही पता चलता है कि भंडारण की जितनी क्षमता इसमें होती है शायद ही किसी स्टोर रूम की होती होगी। हर अन्न के लिए अलग अलग खाने (सांचे) बने होते थे उसका माप दूण या या बोरी के हिसाब से होता था और जब बात इसके बाहरी सजावट की की जाय तो रवांई-जौनपुर में स्थापत्य कला के ये बेजोड़ नमूने हैं इसके आगे के खंभों पर बारीकी से नक्काशी दार बेल बूटे की आकृतियां बनी हुई होती है जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। दरवाजा छोटा-सा होता है। ताला खोलने के लिए एक लंबी छड़नुमा आकर की चाबी होती है और इसका ताला खोलना हर किसी की बसकी बात नहीं होती है ताला बड़ी तरकीब के साथ खोलना होता है। कोठार/कुठार के दरवाजे से मुख्‍य घर से एक सांगल/चेन बंधी रहती थी और उसमे बीच-बीच में घंटियां भी बंधी रहती थी ताकि यदि कोई चोर चोरी करने के इरादे से कुठार में घुसने की कोशिश भी करेगा तो घर के लोगों को पता चल जाता था कि चोरी होने वाली है।
सुरक्षा की ये तरकीब भी अनोखी ही थी यानी कि आज के सीसीटीवी कैमरे चोर को पकड़ने में उतने मददगार साबित नहीं हो पा रहे हैं जितनी हमारे बुजुर्गों की तरकीब कामयाब रही है,भंडारण का जो तरीका हमारे बुजुर्गों ने ईजाद किया है वो आज के बड़े से बड़े इंजीनियर भी नहीं कर पाए हैं, लकड़ी के इस भंडार में किसी भी अन्न में कभी न तो कीड़े पड़ने की संभावना रही है न कोई फफूंद, इस कुठार में हमारी लोक संस्कृति भी दिखती है, पहाड़ों में लोग पुराने समय से ही खेती किसानी से अपना गुजर बसर करते थे और खेती बाड़ी से ही वे सम्पन्न भी थे लोगों में प्रतिस्पर्धा नाम की चीज दूर दूर तक नहीं थी अगर प्रतिस्पर्धा थी तो वो खेती बाड़ी और पशुपालन को लेकर थी जिस परिवार की जितनी ज्यादा जमीन उसका उतना बड़ा रुतबा और ओहदा होता था जिस परिवार के पास कुठार होता था उस घर को सर्वगुण सम्पन्न माना जाता था लोग नाते रिश्ते भी जमीन जायदाद और अन्न धन को देखकर करते थे समय बदला और समय के साथ साथ लोगो की सोच और काम करने के तरीको में बदलाव हुए और साथ ही रहन सहन में भी बदलाव हुए लोगों ने कुठार की जगह घर बनाते समय एक स्टोर रूम बनाना शुरू कर दिया क्योंकि खेती में अब कोदा, झंगोरा, कोणी, धान, गेंहू की जगह टमाटर,बीन्स, शिमला मिर्च, राई, मुली, गोभी, मटर, आलू आदि नगदी फसलों ने ले ली है तो हमारे लिए कुठार होना जरूरी नहीं है।
जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष राकेश राणा ने कहा कि आज कुठार अपने अस्तित्व ही नहीं अपने नाम और संरक्षण की लड़ाई लड रहा है यदि इसका संरक्षण होम स्टे और पर्यटन के क्षेत्र में किया जाय तो संभवतः इसका बचाव हो सकता है

Previous Post

अखाड़ा परिषद ने सीमा हैदर के प्रेम पर लगाया प्रश्न चिन्ह, कहा फैक्ट चेक करे सरकार

Next Post

उत्तराखंड में मुख्य सचिव एसएस संधू का कार्यकाल विस्तार, इन अफसरों को लगा झटका

पहाड़वासी

पहाड़वासी

Related Posts

नववर्ष 2026 के स्वागत एवं ‘थर्टी फर्स्ट’ की पूर्व संध्या को लेकर रुद्रप्रयाग पुलिस ने की प्रभावी सुरक्षा व यातायात व्यवस्था
उत्तराखंड

नववर्ष 2026 के स्वागत एवं ‘थर्टी फर्स्ट’ की पूर्व संध्या को लेकर रुद्रप्रयाग पुलिस ने की प्रभावी सुरक्षा व यातायात व्यवस्था

December 29, 2025
वन्य जीव सक्रियता के बीच बच्चों की सुरक्षा हेतु बड़ा कदम,जिलाधिकारी के निर्देशन में संवेदनशील 20 विद्यालयों में शुरू हुई एस्कॉर्ट व्यवस्था
उत्तराखंड

वन्य जीव सक्रियता के बीच बच्चों की सुरक्षा हेतु बड़ा कदम,जिलाधिकारी के निर्देशन में संवेदनशील 20 विद्यालयों में शुरू हुई एस्कॉर्ट व्यवस्था

December 15, 2025
सतपुली नयारघाटी में एडवेंचर फेस्टिवल का ट्रायल शुरू
उत्तराखंड

सतपुली नयारघाटी में एडवेंचर फेस्टिवल का ट्रायल शुरू

December 12, 2025
देवप्रयाग विस क्षेत्र की आठ सड़कों को केंद्र से मिली स्वीकृति
उत्तराखंड

देवप्रयाग विस क्षेत्र की आठ सड़कों को केंद्र से मिली स्वीकृति

December 12, 2025
Next Post
उत्तराखंड में मुख्य सचिव एसएस संधू का कार्यकाल विस्तार, इन अफसरों को लगा झटका

उत्तराखंड में मुख्य सचिव एसएस संधू का कार्यकाल विस्तार, इन अफसरों को लगा झटका

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

No Result
View All Result

Categories

  • Uncategorized (9)
  • अन्य (12)
  • अपराध (174)
  • उत्तराखंड (3,824)
  • कुमाऊं (81)
  • खेल (44)
  • गढ़वाल (162)
  • दुर्घटना (204)
  • देश-विदेश (109)
  • धार्मिक (93)
  • पर्यटन (222)
  • यूथ (77)
  • राजनीति (98)
  • रुद्रप्रयाग (800)
  • शिक्षा (106)
  • सामाजिक (199)
  • स्वास्थ्य (73)

Recent.

नंदा-सुनंदा; बालिकाओं की शिक्षारूपी पूजा से जिला प्र्रशासन ने शुरू किया वर्ष का पहला दिन

नंदा-सुनंदा; बालिकाओं की शिक्षारूपी पूजा से जिला प्र्रशासन ने शुरू किया वर्ष का पहला दिन

January 2, 2026
नववर्ष पर उत्तराखण्ड पुलिस कर्मियों को पदोन्नति का तोहफा, 229 मुख्य आरक्षी बने अपर उपनिरीक्षक

नववर्ष पर उत्तराखण्ड पुलिस कर्मियों को पदोन्नति का तोहफा, 229 मुख्य आरक्षी बने अपर उपनिरीक्षक

January 1, 2026
घरेलू गैस के दुरुपयोग पर खाद्य आपूर्ति विभाग की सख़्ती,129 होटलों पर छापेमारी19 सिलेंडर पकड़े गए,43 हजार 700 रुपये का लगाया जुर्माना

घरेलू गैस के दुरुपयोग पर खाद्य आपूर्ति विभाग की सख़्ती,129 होटलों पर छापेमारी19 सिलेंडर पकड़े गए,43 हजार 700 रुपये का लगाया जुर्माना

December 31, 2025

A Local pahad news and cultural network of Uttarakhand

© 2022 Pahadvasi. All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • अपराध
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • यूथ
  • शिक्षा
  • खेल
  • स्वास्थ्य

© 2022 Pahadvasi. All Rights Reserved

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

You cannot copy content of this page