ब्यूरो
उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 का शुभारंभ 19 अप्रैल से होने जा रहा है। इसी दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलेंगे। यात्रा को देखते हुए शासन-प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है और श्रद्धालुओं के पंजीकरण की प्रक्रिया 6 मार्च से शुरू हो चुकी है। इसी बीच बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए बदरीनाथ और केदारनाथ धाम समेत अपने अधीन आने वाले 47 मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है।देहरादून स्थित बीकेटीसी के शिविर कार्यालय में समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में बजट बैठक आयोजित की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 121.7 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया। इसी बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए बदरीनाथ और केदारनाथ धाम सहित समिति के अधीन 47 मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया।बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि लंबे समय से धामों की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस तरह की मांग उठ रही थी। उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन धर्म में आस्था रखते हैं और बाबा केदारनाथ तथा बदरी विशाल में श्रद्धा रखते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन जो सनातन धर्म को नहीं मानते उनका मंदिर परिसर और गर्भगृह में प्रवेश वर्जित रहेगा।समिति के अनुसार यह प्रतिबंध केवल मंदिर परिसर और गर्भगृह तक सीमित रहेगा। धामों तक पहुंचने के लिए डोली, कंडी, घोड़े-खच्चर जैसी सेवाओं में लगे गैर-हिंदू लोगों के रोजगार पर इसका असर नहीं पड़ेगा। वे मंदिर परिसर के बाहर तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

हरकी पैड़ी विवाद के बाद तेज हुई मांग़,
रूद्रप्रयाग।दरअसल, जनवरी में हरिद्वार की गंगा सभा ने हरकी पैड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग उठाई थी और वहां “अहिंदु प्रवेश निषेध” के बोर्ड भी लगाए गए थे। इसके बाद राज्य में अन्य धार्मिक स्थलों पर भी ऐसी मांग उठने लगी थी।बॉक्स फैसले पर देशभर में मिली-जुली प्रतिक्रियारूद्रप्रयाग। इस मुद्दे पर राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा निर्णय बताया, जबकि विपक्षी दलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताते हुए सवाल उठाए थे।हालांकि ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा था कि हर धर्मस्थल के अपने नियम होते हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने मंदिर समितियों पर छोड़ा निर्णय,
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि धार्मिक स्थलों के संचालन से जुड़े निर्णय मंदिर समितियों और संबंधित धार्मिक संगठनों की राय के आधार पर लिए जाएंगे।बॉक्स इन मंदिरों में लागू होगा प्रतिबंधरूद्रप्रयाग। बीकेटीसी के अधीन बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के अलावा त्रियुगीनारायण, नरसिंह मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, कालीमठ मंदिर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर, मद्महेश्वर, योगध्यान बदरी, भविष्य बदरी, आदि बदरी, वृद्ध बदरी, गौरीकुंड मंदिर, आदिकेदारेश्वर मंदिर समेत कुल 47 मंदिरों में यह प्रतिबंध लागू होगा।
इन धर्मों पर लागू नहीं होगा नियम
रूद्रप्रयाग। समिति ने स्पष्ट किया है कि गैर-सनातनी से आशय उन लोगों से है जो सनातन धर्म को नहीं मानते। सिख, जैन और बौद्ध धर्म को सनातन परंपरा से जुड़ा मानते हुए इन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
क्या है बीकेटीसी। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) वर्ष 1939 के अधिनियम के तहत गठित संस्था है, जो बदरीनाथ और केदारनाथ धाम समेत कुल 47 मंदिरों के प्रबंधन, सुरक्षा, रखरखाव और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का संचालन करती है। चारधाम यात्रा 2026 से पहले समिति द्वारा लिया गया यह निर्णय अब पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।






