ब्यूरो -देहरादून। स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर नर्सिंग स्टाफ से 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को नेहरू कॉलोनी पुलिस ने पिथौरागढ़ के एंचोली क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी नेपाल भागने की फिराक में था और लगातार अपने ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने का प्रयास कर रहा था।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान चारू चन्द्र जोशी (34) निवासी बागेश्वर के रूप में हुई है। पुलिस ने पिथौरागढ़ पुलिस के सहयोग से उसे 21 अगस्त को गिरफ्तार किया। वहां न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद आरोपी को देहरादून लाया गया।
शादी और सरकारी नौकरी का झांसा
पुलिस के अनुसार, पीड़िता एक निजी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के पद पर कार्यरत है। उसकी मुलाकात आरोपी से शादी डॉट कॉम के माध्यम से हुई थी। आरोपी ने खुद को स्वास्थ्य विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर बताते हुए अधिकारियों से करीबी संबंध होने का दावा किया। इसके बाद उसने पीड़िता को शादी करने और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।
इसी झांसे में लेकर आरोपी ने अलग-अलग तारीखों में पीड़िता से करीब 32 लाख रुपये ले लिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़िता ने 17 अगस्त को नेहरू कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पहले स्वास्थ्य विभाग में था फार्मासिस्ट
जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर फार्मासिस्ट के पद पर काम कर चुका था। वर्ष 2022 में उसके खिलाफ नैनीताल जिले में धोखाधड़ी और दुष्कर्म समेत मामले दर्ज हुए और जेल जाने के बाद उसे विभाग की नौकरी से हटा दिया गया था।
पुलिस का कहना है कि नौकरी छूटने के बाद आरोपी ने अपनी पुरानी विभागीय पहचान का इस्तेमाल कर युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देना शुरू कर दिया। वह खुद को स्वास्थ्य विभाग में नियुक्त बताकर अधिकारियों से पहचान होने का दावा करता था और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों से मोटी रकम ऐंठता था।
आधा दर्जन से ज्यादा मुकदमे
पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ देहरादून, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर समेत विभिन्न स्थानों पर धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं में सात मुकदमे दर्ज हैं। इनमें वर्ष 2022 के कई धोखाधड़ी के मामले और एक दुष्कर्म का मामला भी शामिल है।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि मौजूदा मामले में पीड़िता से प्राप्त रकम का अधिकांश हिस्सा उसने अपने खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमों के कथित सेटलमेंट में खर्च कर दिया। पुलिस इन दावों का दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सत्यापन कर रही है।
जांच में अब तक आरोपी के किसी परीक्षा एजेंसी या चयन प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति के संपर्क में होने के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस के अनुसार, प्रथमदृष्टया मामला व्यक्तिगत स्तर पर नौकरी का झांसा देकर की गई धोखाधड़ी का सामने आया है।
पुलिस टीम
कार्रवाई में थानाध्यक्ष नेहरू कॉलोनी उपनिरीक्षक मनोज नौटियाल, चौकी प्रभारी जोगीवाला उपनिरीक्षक गिरीश चन्द्र बडोनी तथा एसओजी टीम के हेड कांस्टेबल किरन, कांस्टेबल आशीष राठी समेत पुलिसकर्मी शामिल रहे।






