चमोली– जिले के सलूड–डुंगा गांव में आयोजित विश्व सांस्कृतिक धरोहर रमाण मेले का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली। मेले का मुख्य आकर्षण बिना संवाद के केवल भाव-भंगिमा के माध्यम से प्रस्तुत की गई रामलीला रही, जिसने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मेले के दौरान पारंपरिक वेशभूषा और लोक कला के अद्भुत संगम ने क्षेत्रीय संस्कृति की समृद्ध झलक प्रस्तुत की। कलाकारों ने चेहरे के हाव-भाव और शारीरिक अभिनय के माध्यम से रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत किया। दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर भूमियाल देवता के पश्वा ने अवतरित होकर क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। मेले में पारंपरिक ढोल-दमाऊं, रणसिंघा और लोक वाद्यों की धुन पर लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

विशिष्ट शैली के लिए प्रसिद्ध रमाण मेला अपनी अनूठी परंपरा और प्रस्तुति के कारण देश-विदेश में पहचान बना चुका है। मेले में 18 प्रकार के मुखौटों का उपयोग किया जाता है, जो स्थानीय कला और संस्कृति को दर्शाते हैं। यह आयोजन पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
मेले के आयोजन को भव्य बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समिति का विशेष योगदान रहा। आयोजन समिति ने मेले को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं।
रमाण मेला न केवल सांस्कृतिक विरासत को संजोने का माध्यम है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी कार्य कर रहा है।






