ब्यूरो –
सीमांत जनपद चमोली के देवाल विकासखंड का पिनाऊं गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। सड़क के अभाव में बुधवार को प्रसव पीड़ा से कराह रही आंगनबाड़ी कार्यकत्री को ग्रामीणों ने करीब छह किलोमीटर तक डंडी के सहारे पैदल ले जाकर सड़क तकपहुंचाया। इसके बाद भी परिजनों और ग्रामीणों को कई घंटे तक हेली का इंतजार करना पड़ा। हेली सेवा नहीं मिलने पर देर रात गर्भवती को पहले देवाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और वहां चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस से जिला अस्पताल बागेश्वर ले जाया गया।जानकारी के अनुसार पिनाऊं गांव की आंगनबाड़ी कार्यकत्री खिमुली देवी को बुधवार को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। गांव में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें डंडी के सहारे करीब छह किलोमीटर दूर पाटिंगधार तक पहुंचाया। इस दौरान क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग को ग्रामीणों ने खुद ठीक कर गर्भवती को सुरक्षित सड़क तक पहुंचाया।ग्राम प्रधान लखपत दानू ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 11 बजे गर्भवती को डंडी के सहारे गांव से सड़क मार्ग तक लाया गया। इसके बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे तक हेली का इंतजार किया गया, लेकिन हेली नहीं पहुंची। शाम छह बजे ग्रामीण गर्भवती को कालीताल सड़क मार्ग तक लेकर पहुंचे। यहां से उन्हें वाहन के माध्यम से रात करीब साढ़े नौ बजे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचाया गया। देवाल में चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस से उन्हें जिला अस्पताल बागेश्वर ले जाया गया। पिनाऊं गांव के लिए वर्ष 2015 में पूर्व विधायक स्व. शेर सिंह दानू के नाम पर 23 किलोमीटर लंबी धुराधारकोट-वांक-पिनाऊं सड़क स्वीकृत हुई थी।ग्रामीणों का कहना है कि स्वीकृति के करीब 11 वर्ष बाद भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीणों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से भी सड़क को लेकर घोषणाएं की गई थीं, लेकिन धरातल पर सड़क सुविधा नहीं पहुंच सकी।ग्राम प्रधान लखपत दानू ने कहा कि सड़क नहीं होने के कारण गांव के लोगों को बीमारी और प्रसव जैसी आपात स्थिति में डंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। उन्होंने सड़क निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग की है।लोक निर्माण विभाग थराली के अधिशासी अभियंता मनीष डोगरा ने बताया कि पिनाऊं के लिए स्वीकृत सड़क में काफी संख्या में बांज और बुरांश के पेड़ आ रहे हैं। सड़क निर्माण के लिए वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने बताया कि लोहाजंग से वांक गांव तक सड़क बन चुकी है। ग्रामीणों की सहमति होने पर वांक से पिनाऊं तक सड़क निर्माण का विकल्प भी देखा जा सकता है।ग्रामीणों ने सरकार और विभाग से सड़क निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी गर्भवती महिला, बुजुर्ग या गंभीर मरीज को इस तरह जोखिम उठाकर अस्पताल न पहुंचाना पड़े






