ब्यूरो :उत्तराखंड में जानवरों पर लंपी वायरस लगातार कहर बरपा रहा है। अब तक इस वायरस के 15331 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से 288 जानवरों की मौत हो चुकी है। मरने वाले जानवरों में सबसे ज्यादा गोवंशी शामिल हैं। मामलों की भयावह स्थिति देखते हुए विभाग ने वैक्सीनेशन का कार्य तेज कर दिया है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बीते 18 मई तक प्रदेश में लंपी वायरस के 6215 मामले मिले थे जो 18 मई से आठ जून यानी करीब तीन हफ्ते में ढाई गुना बढ़ गए हैं। वहीं अब तक 12 हजार 767 पशु इस वायरस की चपेट में आने के बाद अब रिकवर हो चुके हैं। वर्तमान में चम्पावत जिला इस वायरस से सबसे अधिक प्रभावित है। यहां 2512 मामले सामने आए हैं और 127 जानवर अपनी जान गंवा चुके हैं जबकि पिथौरागढ़ में सबसे अधिक 3948 मामले सामने आए हैं।

पशुपालन निदेशक डा. प्रेम कुमार ने बताया कि लंपी वायरस के मामलों से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। आठ जिलों में 52 उपरिकेंद्र बनाए गए है। लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) की रोकथाम के लिए अब तक 11 लाख चार हजार 900 पशुओं का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि लंपी स्किन डिजीज कुछ जिलों में जरूर चुनौती है। विभाग इस पर लगातार नजर बनाए है। तकरीबन सवा तीन सौ टीम ब्लाकों में भेजी गई हैं। प्रत्येक टीम में दो से तीन लोग शामिल हैं। संक्रमित क्षेत्र पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरे क्षेत्र में वैक्सीनेशन करें व इसमें तेजी लाएं। लंपी स्किन डिजीज को गांठदार त्वचा रोग वायरस भी कहा जाता है। यह संक्रामक बीमारी एक पशु से दूसरे को होती है। संक्रमित के संपर्क में आने से दूसरा पशु भी बीमार हो सकता है। इसमें संक्रमित पशु के लक्षण की बात करें तो बुखार आना, वजन में कमी, आंखों से पानी टपकना, शरीर पर दाने, दूध कम देना, भूख ना लगना आदि है।