रुद्रप्रयाग -श्री केदारनाथ धाम यात्रा 2026 के दौरान सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों में पवित्र मंदाकिनी नदी में प्लास्टिक की बोतलें एवं अन्य प्लास्टिक कचरा तैरते हुए दिखाई देने संबंधी वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले का गंभीर संज्ञान लिया है। कुछ स्थानों पर लोगों द्वारा कचरे को सीधे नदी अथवा पहाड़ियों से नीचे फेंके जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिस पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मंदाकिनी नदी को प्रदूषित करने वाले किसी भी व्यक्ति, व्यापारी अथवा असामाजिक तत्व को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को यात्रा मार्ग पर निरंतर निगरानी रखने तथा प्लास्टिक कचरे के अनुचित निस्तारण पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

यात्रा मार्ग पर स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु सुलभ इंटरनेशनल के 400 से अधिक सफाई कर्मी सीतापुर से केदारनाथ धाम तक लगातार सफाई कार्य में जुटे हुए हैं। सोनप्रयाग में प्लास्टिक कचरे को कॉम्पैक्ट करने के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं, जहां अब तक लगभग 7 टन प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस कर रीसाइक्लिंग हेतु भेजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त गीले कचरे को प्रतिदिन 5 से 6 डंपरों के माध्यम से रुद्रप्रयाग स्थित डंपिंग जोन तक पहुंचाया जा रहा है।प्रशासन द्वारा यात्रा मार्ग पर 600 से अधिक डस्टबिन स्थापित किए गए हैं तथा पर्यावरण मित्रों की तैनाती कर नियमित सफाई एवं कचरा संग्रहण की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। तीर्थ यात्रियों को भी लगातार जागरूक किया जा रहा है कि वे कचरे को निर्धारित डस्टबिन में ही डालें तथा धाम एवं मंदाकिनी नदी की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करें।हालांकि प्रशासन एवं सफाई कर्मियों की निरंतर मेहनत के बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों की लापरवाही समस्या को बढ़ा रही है।

यात्रा मार्ग पर प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग तथा कचरे का खुले में अथवा नदी किनारे फेंका जाना पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा सभी व्यापारियों, नींबू पानी एवं छोटे रोजगार संचालित करने वाले व्यक्तियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्लास्टिक कचरे को निर्धारित कूड़ेदान में ही डालें।उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल रावत ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार श्री केदारनाथ धाम, यात्रा मार्गों, सड़क मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई तथा शौचालय व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है। इसी क्रम में सुलभ इंटरनेशनल के माध्यम से लगभग 400 सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें से 110 कार्मिक केवल गौरीकुंड क्षेत्र में नियुक्त हैं। सुलभ इंटरनेशनल द्वारा यात्रा मार्गों, शौचालयों एवं सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई का कार्य किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो के संबंध में भी प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए संबंधित नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि नदी-नालों एवं अन्य स्थानों पर एकत्रित कचरे का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। उप जिलाधिकारी ने सभी यात्रियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे स्वच्छता बनाए रखने हेतु कूड़ेदानों का प्रयोग करें तथा जिला प्रशासन के स्वच्छता अभियान में सहयोग प्रदान करें।सुलभ इंटरनेशनल के प्रतिनिधि धनंजय पाठक ने बताया कि गौरीकुंड क्षेत्र में नदी में कुछ प्लास्टिक की बोतलें तैरती दिखाई देने संबंधी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं, स्थानीय व्यापारियों एवं आमजन से अपील करते हुए कहा कि धाम की पवित्रता बनाए रखने हेतु प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थ निर्धारित डस्टबिन में ही डालें। उन्होंने कहा कि कई बार लोग कचरे को पहाड़ियों अथवा नदी में फेंक देते हैं, जिससे अत्यंत दुर्गम एवं खतरनाक स्थानों पर सफाई कर्मियों को अपनी जान जोखिम में डालकर सफाई कार्य करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में कचरा निकालना और उसका वैज्ञानिक निस्तारण करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो जाता है।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यदि सभी लोग जिम्मेदारीपूर्वक डस्टबिन का उपयोग करें तो सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी रूप से संचालित की जा सकती है तथा श्री केदारनाथ धाम यात्रा को ग्रीन, क्लीन एवं स्वच्छ स्वरूप में निरंतर संचालित रखा जा सकता है।जिला प्रशासन ने पुनः अपील की है कि केदारनाथ धाम की पवित्रता, प्राकृतिक सौंदर्य एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना केवल प्रशासन की नहीं बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक एवं व्यापारी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी एवं जागरूकता के माध्यम से ही आस्था और प्रकृति के इस संतुलन को सुरक्षित रखा जा सकता है।






