टिहरी गढ़वाल-गर्मी बढ़ने का असर टिहरी बांध की झील पर भी पड़ा है। भागीरथी और भिलंगना नदी से पानी कम आने के कारण झील का जलस्तर न्यूनतम आरएल 741 मीटर पहुंच गया है। इसका प्रभाव विद्युत उत्पादन पर भी पड़ रहा है। सामान्य दिनों में 25 से 30 मिलियन विद्युत उत्पादन करने वाला टिहरी बांध इन दिनों चार मिलियन यूनिट ही उत्पादन कर पा रहा है। कोटेश्वर बांध से भी महज 1.85 मिलियन यूनिट बिजली पैदा हो रही है।
42 वर्ग किलोमीटर में फैली झील का जलस्तर सामान्य दिनों में आरएल 830 मीटर रहता है। वर्तमान में जलस्तर न्यूनतम 741 मीटर पहुंच गया है। भागीरथी नदी से 122 क्यूमेक्स, भिलंगना से 34 क्यूमेक्स और सहायक नदियों से 47 क्यूमेक्स पानी आ रहा है। जबकि झील से इन दिनों में 142 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। जलस्तर कम होने से विद्युत उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इन दिनों टीएचडीसी तीन घंटे सुबह और तीन घंटे शाम को टरबाइन चला पा रहा है। अगस्त-सितंबर माह में बारिश के दिनों में जब झील अधिकतम आरएल 830 मीटर भरी रहती है, तो विद्युत उत्पादन भी 25 से 30 मिलियन यूनिट होता है।गर्मी शुरू होते ही 15 मार्च से 15 जून तक टीएचडीसी के सामने देश की ऊर्जा जरूरत पूरी करने से लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़ राज्यों को सिंचाई और पीने के लिए पानी मुहैया करवाना भी चुनौती है। टीएचडीसी के ईडी एलपी जोशी का कहना है कि गर्मी के दिनों में जलस्तर घटना स्वाभाविक है। इसका असर विद्युत उत्पादन पर पड़ता है। मानसून सीजन शुरू होने के बाद जलस्तर भी बढ़ने लगता है। इससे विद्युत उत्पादन भी पर्याप्त मात्रा में होता है।







