• About
  • Contact
No Result
View All Result
  • Login
Pahadvasi
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • अपराध
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • यूथ
  • शिक्षा
  • खेल
  • स्वास्थ्य
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • अपराध
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • यूथ
  • शिक्षा
  • खेल
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
Pahad Vasi
No Result
View All Result
Home उत्तराखंड

गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी लोकभाषाओं को एआई से जोड़ने की पहल शुरू,मुख्यमंत्री धामी ने वॉइस कलेक्शन पोर्टल का किया शुभारंभ, अपनी कुमाऊंनी वॉइस क्लिप से की शुरुआत

by पहाड़वासी
October 22, 2026
in उत्तराखंड, गढ़वाल
Reading Time: 1 min read
0
Share on WhatsappShare on FacebookShare on Twitter

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में एआई स्ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग (AiSE) फाउंडेशन की ‘भाषा एआई’ पहल के तहत गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी लोकभाषाओं के वॉइस कलेक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अपनी कुमाऊंनी भाषा में रिकॉर्ड की गई वॉइस क्लिप के माध्यम से अभियान की शुरुआत की।इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड की लोकभाषाओं के शब्दों, उच्चारण और बोलने की शैलियों का डिजिटल संग्रह तैयार कर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जोड़ना है। इससे भविष्य में एआई आधारित तकनीक के माध्यम से इन भाषाओं में संवाद और स्थानीय भाषा में सूचनाओं की उपलब्धता को बढ़ावा मिल सकेगा।मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बोली-भाषाएं हमारी पहचान हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते उपयोग के बीच क्षेत्रीय भाषाओं को भी तकनीक के अनुरूप विकसित करना होगा, ताकि उत्तराखंड की भाषाई विरासत को वैश्विक पहचान मिल सके।उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोग भी अपनी स्थानीय भाषा में सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें और अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचा सकें। इसके लिए एआई का स्थानीय भाषाओं को सही ढंग से समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में शब्दों के उच्चारण और बोलने की शैली में अंतर होता है। पोर्टल के माध्यम से इन विविधताओं का संग्रह तैयार होने से एआई को लोकभाषाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।पद्मश्री लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने कहा कि गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं में लोकगीत, जागर और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्ध विरासत समाहित है। जागर अकादमी इस पहल में भाषाओं के सही उच्चारण और मौलिकता को बनाए रखने में सहयोग करेगी।एआईएसई फाउंडेशन के संस्थापक सचिदानंद सेमवाल ने बताया कि ‘भाषा एआई’ के तहत तीनों लोकभाषाओं के शब्दों और आवाजों का संग्रह किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में एआई तकनीक को इन भाषाओं में संवाद करने में सक्षम बनाना है।इस अवसर पर शक्ति प्रसाद भट्ट, गजेंद्र नौटियाल, अनिरुद्ध रैथवान, निधि सेमवाल, अनिल गोदियाल, डॉ. जेके पांडे और देव रतूड़ी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

Previous Post

नवंबर के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित राष्ट्रपति का केदारनाथ दौरा, प्रशासन ने शुरू की तैयारियां,श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर भी रहेगा विशेष ध्यान

Next Post

पंवाली कांठा समेत उच्च हिमालयी बुग्यालों में वन विभाग की गश्ततीन दिन में 60 किमी पैदल चले वनकर्मी, मोनाल और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले

पहाड़वासी

पहाड़वासी

Related Posts

श्रीनगर में अंतरजनपदीय पुलिस शूटिंग प्रतियोगिता शुरू12 टीमों के 120 से अधिक निशानेबाज दिखाएंगे दमखम, 24 अक्टूबर को होगा समापन
उत्तराखंड

श्रीनगर में अंतरजनपदीय पुलिस शूटिंग प्रतियोगिता शुरू12 टीमों के 120 से अधिक निशानेबाज दिखाएंगे दमखम, 24 अक्टूबर को होगा समापन

October 22, 2026
23 नवंबर से शुरू होगा बैकुंठ चतुर्दशी मेला, तैयारियां शुरू
उत्तराखंड

23 नवंबर से शुरू होगा बैकुंठ चतुर्दशी मेला, तैयारियां शुरू

October 22, 2026
पंवाली कांठा समेत उच्च हिमालयी बुग्यालों में वन विभाग की गश्ततीन दिन में 60 किमी पैदल चले वनकर्मी, मोनाल और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले
उत्तराखंड

पंवाली कांठा समेत उच्च हिमालयी बुग्यालों में वन विभाग की गश्ततीन दिन में 60 किमी पैदल चले वनकर्मी, मोनाल और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले

October 22, 2026
नवंबर के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित राष्ट्रपति का केदारनाथ दौरा, प्रशासन ने शुरू की तैयारियां,श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर भी रहेगा विशेष ध्यान
उत्तराखंड

नवंबर के प्रथम सप्ताह में प्रस्तावित राष्ट्रपति का केदारनाथ दौरा, प्रशासन ने शुरू की तैयारियां,श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर भी रहेगा विशेष ध्यान

October 21, 2026
Next Post
पंवाली कांठा समेत उच्च हिमालयी बुग्यालों में वन विभाग की गश्ततीन दिन में 60 किमी पैदल चले वनकर्मी, मोनाल और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले

पंवाली कांठा समेत उच्च हिमालयी बुग्यालों में वन विभाग की गश्ततीन दिन में 60 किमी पैदल चले वनकर्मी, मोनाल और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

No Result
View All Result

Categories

  • Uncategorized (9)
  • अन्य (12)
  • अपराध (223)
  • उत्तराखंड (4,380)
  • कुमाऊं (102)
  • खेल (47)
  • गढ़वाल (436)
  • दुर्घटना (228)
  • देश-विदेश (118)
  • धार्मिक (123)
  • पर्यटन (232)
  • पौड़ी गढ़वाल (2)
  • यूथ (82)
  • राजनीति (103)
  • रुद्रप्रयाग (882)
  • शिक्षा (116)
  • सामाजिक (225)
  • स्वास्थ्य (86)

Recent.

श्रीनगर में अंतरजनपदीय पुलिस शूटिंग प्रतियोगिता शुरू12 टीमों के 120 से अधिक निशानेबाज दिखाएंगे दमखम, 24 अक्टूबर को होगा समापन

श्रीनगर में अंतरजनपदीय पुलिस शूटिंग प्रतियोगिता शुरू12 टीमों के 120 से अधिक निशानेबाज दिखाएंगे दमखम, 24 अक्टूबर को होगा समापन

October 22, 2026
23 नवंबर से शुरू होगा बैकुंठ चतुर्दशी मेला, तैयारियां शुरू

23 नवंबर से शुरू होगा बैकुंठ चतुर्दशी मेला, तैयारियां शुरू

October 22, 2026
पंवाली कांठा समेत उच्च हिमालयी बुग्यालों में वन विभाग की गश्ततीन दिन में 60 किमी पैदल चले वनकर्मी, मोनाल और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले

पंवाली कांठा समेत उच्च हिमालयी बुग्यालों में वन विभाग की गश्ततीन दिन में 60 किमी पैदल चले वनकर्मी, मोनाल और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले

October 22, 2026

A Local pahad news and cultural network of Uttarakhand

© 2026 Pahadvasi. All Rights Reserved

No Result
View All Result
  • उत्तराखंड
  • राजनीति
  • अपराध
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • यूथ
  • शिक्षा
  • खेल
  • स्वास्थ्य

© 2026 Pahadvasi. All Rights Reserved

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

You cannot copy content of this page