टिहरी गढ़वाल-42 वर्ष बाद टिहरी जनपद के लोस्तू पट्टी के 28 गांवों के आराध्य भगवान घंटाकर्ण घंडियाल देवता देव निशाण व भक्तों के जयकारों के साथ केदारनाथ पहुंचे। जहां उन्होंने अपने आराध्य बाबा केदार के दर्शन किए। इस मौके पर पूरा क्षेत्र बाबा केदार व घंटाकर्ण देवता के जयकारों से गूंज उठा। देर शाम को रात्रि प्रवास के लिए घंटाकर्ण देवता त्रियुगीनाराण पहुंचे। यहां पर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा भगवान व भक्तों का पौराणिक वाद्य यंत्रों के साथ स्वागत किया गया।बृहस्पतिवार को भगवान घंटाकर्ण देवता अपने नौ देवी-देवताओं के निशाण व वाद्य यंत्रों के साथ बेस कैंप से दो किमी पैदल चलकर केदारनाथ मंदिर में पहुंचे। इस मौके पर देवप्रयाग विस के विधायक विनोद कंडारी भी मौजूद थे। यहां पर घंटाकर्ण देवता के रावल दिनेश प्रसाद जोशी ने विशेष पूजा-अर्चना की और देवता का आह्वान किया। इसके उपरांत देवता का निशाण लेकर रावल व अन्य भक्तजन केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में पहुंचे। जहां पर घंटाकर्ण देवता ने अपने आराध्य बाबा केदार के दर्शन किए। इस मौके पर गर्भगृह व मंदिर का सभामंडप जयकारों से गूंज उठा।

रावल डीपी जोशी व केदारनाथ के मुख्य पुजारी शिव लिंग ने संयुक्त रूप से विशेष पूजा-अर्चना की और अन्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। आधा घंटे के बाद घंटाकर्ण व अन्य देवी-देवताओं के निशाण मंदिर से बाहर परिसर में पहुंंचे। सुबह 10 बजे पौराणिक वाद्य यंत्रों के साथ घंटाकर्ण देवता ने बाबा केदार से विदा ली और पैदल मार्ग से अपने मूल मंदिर के लिए प्रस्थान किया। बेस कैंप, रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग होते हुए रात्रि 9 बजे घंटाकर्ण देवता रात्रि प्रवास के लिए त्रियुगीनारायण पहुंचे।सुबह 10 बजे पौराणिक वाद्य यंत्रों के साथ घंटाकर्ण देवता ने बाबा केदार से विदा ली और पैदल मार्ग से अपने मूल मंदिर के लिए प्रस्थान किया। बेस कैंप, रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग होते हुए रात्रि 9 बजे घंटाकर्ण देवता रात्रि प्रवास के लिए त्रियुगीनारायण पहुंचे। घंटाकर्ण मंदिर समिति के अध्यक्ष सते सिंह भंडारी व महासचिव उमेद सिंह मेहरा ने बताया कि 42 वर्ष बाद भगवान घंटाकर्ण ने अपने आराध्य बाबा केदार के दर्शन किए हैं। लोस्तू से बीते 24 अप्रैल को देवता ने केदारनाथ के लिए प्रस्थान किया और विभिन्न गांवों से होते हुए बीते 26 अप्रैल को केदारनाथ बेस कैंप पहुंचे थे। इस मौके पर देवता के पश्वा सोबन सिंह कैंतुरा, राजेंद्र सिंह कैंतुरा, रामेश्वर बर्त्वाल, धर्म सिंह बर्त्वाल, विजेंद्र सिंह शामिल थे।







