देहरादून। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की गूंज सोमवार को देहरादून में भी सुनाई दी। कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर छात्र हितों और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग उठाई, जबकि उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने लंबित भर्तियों और परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग को लेकर सचिवालय कूच किया। दोनों आंदोलनों के चलते राजधानी में दिनभर विरोध-प्रदर्शन का माहौल रहा।परेड ग्राउंड के पास सतीश धौलाखंडी के नेतृत्व में विभिन्न संगठनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, एनटीए को समाप्त करने और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग की। महिला मंच की जिला संयोजक निर्मला बिष्ट ने कहा कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की अनियमितताओं ने छात्रों का भविष्य संकट में डाल दिया है। मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी और प्रदेश महिला कांग्रेस की उपाध्यक्ष आशा मनोरमा डोबरियाल ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की। प्रदर्शन में कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल, एसएफआई, आम आदमी पार्टी और अन्य सामाजिक संगठनों ने भाग लिया।दूसरी ओर उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में बेरोजगार युवाओं ने सचिवालय कूच किया। सुभाष रोड पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गए। युवाओं ने फॉरेस्ट गार्ड, सहायक लेखाकार, कनिष्ठ सहायक, कांस्टेबल, दरोगा सहित विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती निकालने और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग से आरओ, एआरओ, जेई, एई, एएसओ समेत सभी लंबित परीक्षाओं का कैलेंडर जारी करने की मांग की। साथ ही परीक्षा परिणामों के साथ अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक करने और सहायक अध्यापक भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की भी मांग उठाई। बाद में मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।इस बीच उत्तराखंड कांग्रेस चुनाव प्रबंध समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि रोजगार और निष्पक्ष भर्ती की मांग कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए, दमन नहीं करना चाहिए।प्रदर्शनकारी संगठनों ने घोषणा की कि 22 जुलाई को गांधी पार्क में फिर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।






