टिहरी। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को स्वरोजगार और आय का माध्यम बनाने के लिए पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक इन योजनाओं के तहत जनपद में पात्र लाभार्थियों को कुल 10 करोड़ 35 लाख 23 हजार 141 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को गौपालन, बकरी पालन, भेड़ पालन, महिला बकरी पालन, ब्रॉयलर फार्म और गोट वैली जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। लाभार्थियों को पशुधन इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता के साथ पशुओं की देखभाल, प्रबंधन और इकाई संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
विभाग के अनुसार, एससीपी गौपालन योजना में 412 लाभार्थियों को करीब 1.48 करोड़ रुपये, टीएसपी गौपालन में 41 लाभार्थियों को 14.76 लाख रुपये, सामान्य वर्ग बकरी पालन में 157 लाभार्थियों को 98.91 लाख रुपये, एससीपी बकरी पालन में 278 लाभार्थियों को 1.75 करोड़ रुपये तथा टीएसपी बकरी पालन में 23 लाभार्थियों को 14.49 लाख रुपये की सहायता दी गई।
इसी तरह एससीपी भेड़ पालन में 166 लाभार्थियों को 1.04 करोड़ रुपये, टीएसपी भेड़ पालन में 17 लाभार्थियों को 10.71 लाख रुपये, महिला बकरी पालन योजना में 200 लाभार्थियों को 70 लाख रुपये, मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन योजना में 308 लाभार्थियों को करीब 34.21 लाख रुपये, ब्रॉयलर फार्म योजना में 440 लाभार्थियों को 1.56 करोड़ रुपये तथा गोट वैली योजना में 437 लाभार्थियों को करीब 2.08 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई।
डॉ. शर्मा ने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के स्थायी साधन उपलब्ध कराना है। पशुपालन इकाइयों के माध्यम से दूध, मांस और अंडा उत्पादन से नियमित आय के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और अन्य पात्र परिवारों को योजनाओं से जोड़ने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है।






