अल्मोड़ा -भैंसियाछाना ब्लॉक में स्थित खनकारी गुंट गांव के टिमेरी तोक के स्कूली बच्चों की एक दिल को छू लेने वाली अपील सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।बच्चों का कहना है कि उन्हें स्कूल जाने के लिए रोज़ाना घंटे पैदल चल कर 14 से 15 किलोमीटर की दूरी तय कर, स्कूल आते जाते हैं.हमारे गांव को रोड दे दो पुष्कर सिंह धामी सर.ये बच्चे अलमोड़ा जिले के भैंसियाछाना ब्लॉक के खानकारी गुंट गांव टिमेरी तोक के हैं. 15 से अधिक छात्र, शिक्षा की खातिर रोजाना इस बेहद कठिन सफर को तय करते हैं. इन बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए सूरज उगने से पहले ही घर से निकलना पड़ता है.इस लंबे रास्ते पर पैदल चलने से होने वाली तकलीफ से बच्चे रास्ते में रोने लगते हैं.गांव में सड़क न होने के कारण वे न तो साइकिल चला सकते हैं और न ही कोई गाड़ी आ-जा सकती है.वर्षों से नेताओं, मुख्यमंत्रियों और क्षेत्र के विधायकों से गुहार लगाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है.ग्रामीण कई सालों से ‘कासन बैंड’ से ‘टिमेरी’ तक 7 किलोमीटर की सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं. सड़क के लिए कई बार सर्वे तो हुए, लेकिन धरातल पर अभी तक सड़क नहीं बन सकी है.यह वीडियो चंदू नेगी नाम के स्थानीय व्यक्ति ने बनाया है.इतने कष्टों के बाद भी बच्चे पढ़ाई करके कुछ बड़ा बनना चाहते हैं,लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनका यह सफर बहुत संघर्षपूर्ण हो गया है.साल 2026 में, उत्तराखंड के बच्चों को सिर्फ़ क्लासरूम तक पहुँचने के लिए घंटों पैदल चलकर अपना बचपन नहीं बिताना पड़ना चाहिए।






